India's Most Mysterious TEMPLE ? | लेपाक्षी मंदिर, वीरभद्र मंदिर | Ramayana, Mahadev, Sri Ram
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर जिसे वीरभद्र मंदिर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, इस मंदिर का इतिहाश भगवान शिव, रामायण और विजयनगर साम्राज्य से ज़ुरा हुआ है.
इस मन्दिर को एक चमत्कारिक रहस्य के रूप में जानते हैं। इस मंदिर का एक पिलर हवा में झुला हुआ है, पिलर के नीचे से लोग कपरा एक तरफ से डाल कर दुसरे तरफ निकालते है, जिसे लोग शुभ मानते हैं।
वैसे तो हमारे देश में करोड़ो मंदिर है, लेकिन लेपाक्षी मंदिर का महत्व ही अलग है | इस मंदिर से हमारे देवी-देवताओं का साक्षात संबंध रहा है। फिर चाहे माता सीता की खोज में भगवान श्रीराम का जटायु से मिलना, या महर्षि अगस्त्य के द्वारा, वीरभद्र रूप में शिवलिंग का स्थापित करना, यह सब कोई चमत्कार से कम नही है.
इस मन्दिर से जूरी कई कहानिया है, जिसे इस विडियो में बताया गया है.
रामायण के अनुशार जब भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण व माता सीता के साथ 14 वर्षों का वनवास काट रहे थे, वनवास के अंतिम समय में,वे इसी जगह आकर ठहरे थे। और रावण ने मारीच की सहायता से माता सीता का इसी जगह से अपहरण कर लिया था और उन्हें अपने पुष्पक विमान में बैठाकर लंका ले गया था.
जटायु ने जब रावण को माता सीता का अपहरण कर ले जाते देखा तो उन्हें रावण से बचाने के लिए, जटायु ने आसमान में रावण के साथ भीषण युद्ध किया था, लेकिन रावण की शक्तियों के आगे जटायु को हार का सामना करना परा। रावण ने जटायु का एक पंख अपनी तलवार से काट दिया, जिस कारण जटायु राम नाम चिल्लाते हुए, इसी लेपाक्षी मंदिर के जगह पर गिरे थे.
बाद में जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज में यहाँ आए तो उन्हें जटायु कराहते हुए मिले। तब भगवान श्रीराम ने जटायु का सिर अपनी गोद में रखकर बार-बार बोल रहे थे ले पाक्षी-ले पाक्षी.
ले पाक्षी एक तेलुगु भाषा का शब्द है, जिसका हिंदी में अर्थ है, उठो पक्षी.
जटायु ने भगवान श्रीराम को रावण के द्वारा माता सीता को अपहरण कर ले जाने की पूर्ण घटना सुना कर, भगवान श्रीराम के गोद में सिर रखे-रखे ही अपनी अंतिम सांसें ली। भगवान श्रीराम की आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे, भगवान श्रीराम ने जटायु को एक पुत्र की भांति अंतिम संस्कार किया था। तब से इस जगह का नाम लेपाक्षी और इस जगह पे बनी इस मंदिर का नाम लेपाक्षी मंदिर पर गया था।
इसी प्रकार से एक और कहानी जो इस मंदिर को वीरभद्र नाम होने से जूरी है
कहानी के अनुसार राजा दक्ष के द्वारा भगवान शिव को अपमान करने और माता सती के आत्म-दाह करने के बाद भगवान शिव काएक रूद्र रूप प्रकट हुआ था, जिसका नाम वीरभद्र था। इसी वीरभद्र रूपी शिव ने राजा दक्ष का गला काट दिया था, जिससे चारों ओर हाहाकार मच गया था |
इस घटना के कई सालो बाद महर्षि अगस्त्य मुनि ने शिवजी के वीरभद्र रूप को समर्पित एक विशाल शिवलिंग व मंदिर का निर्माण इसी जगह पे करवाया था | इस वीरभद्र शिवलिंग के पीछे सात मुह वाला एक विशाल नाग भी विराजमान है | इसी कारण इस मंदिर को वीरभद्र मंदिर नाम से जाना जाता है|
हलाकि इस मंदिर में भगवान शिव, जटायु, माता सीता की चरण छाप के अलावा माँ गंगा और यमुना के साथ साथ दीवारों पर कई तरह के चित्र और डिजाईन बनाई गई है, जो इस मंदिर, लोगो के बीच आकर्षण का केंद्र है।

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